लखीमपुर खीरी, संवादपत्र । धौरहरा कोतवाली क्षेत्र में माथुरपुर में कटान को रोकने के लिए कराए जा रहे कार्यों के बीच नदी ने अब गांव देवीपुरवा की तरफ रूख कर दिया है। नदी का कटान इतना तेज है कि वह गांव के किनारे पहुंच गई है। इससे देवीपुरवा समेत आसपास के गांवों के किसानों की धड़कने बढ़ गई हैं।
जिले में शारदा और घाघरा का कहर जारी है। शारदा नदी थाना फूलबेहड़ क्षेत्र में स्थित ग्रंट 12 गांव को मिटाने के लिए आतुर दिख रही है। वहीं घाघरा नदी धौरहरा क्षेत्र के गांव माथुरपुर को अपने निशाने पर ले लिया था और तेजी से कटान कर रही थी। बाढ़ खंड माथुरपुर में कटान रोकने के लिए युद्धस्तर पर काम करा है, लेकिन इसके बाद भी घाघरा की विनाश लीला रुकने का नाम नहीं ले रही है। माथुरपुर में कटान तो रुक गया है, लेकिन नदी ने अब गांव देवीपुरवा को अपने निशाने पर ले लिया है। वह काफी तेजी के साथ फसलों समेत कृषि भूमि काटकर गांव की तरफ बढ़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि देवीपुरवा और घाघरा नदी के बीच की दूरी महज पांच सौ मीटर बची है। जिस वेग से नदी कटान कर रही है यदि इसी तरह कटान जारी रहा तो आने वाले दिनों में देवीपुरवा गांव का भी अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। नदी का रुख देख देवीपुरवा व आसपास के ग्रामीणों की धड़कने तेज हो गई हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि वह लोग अब क्या करें। नदी के भू-कटान से देवीपुरवा, बोकरिहा, तेलियार, नौवापुर सानी, सुजानपुर, माथुरपुर, सहजदिया, लालापुर, मोटे बाबा, रामनगर बगहा, परौरी, अग्घरा तथा गुलरिहा आदि दर्जन भर से अधिक गांवों के ग्रामीण भूमिहीन हो रहे हैं। गांव देवीपुरवा निवासी कौशल राज, बीरबल, रामू भार्गव, लालता प्रसाद लल्लन महतिया, विदेश कुमार तथा रमेश कुमार आदि ने बताया कि घाघरा नदी पिछले एक माह के अंदर करीब पांच सौ हेक्टेयर भूमि निगलकर आबादी के करीब आ पहुंची है। यदि समय रहते कटान रोधक काम शुरू नहीं कराया गया तो जल्द ही गांव की आबादी घाघरा नदी की कोख में समा जाएगी और करीब दो सौ परिवार बेघर हो जाएंगे।